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सहीह मुस्लिम

नंबर 5422

नंबर 5422किताब 37, नंबर 37अरबी नंबरिंग 2071.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ - وَاللَّفْظُ لِزُهَيْرٍ - قَالَ أَبُو كُرَيْبٍ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ مِسْعَرٍ، عَنْ أَبِي عَوْنٍ الثَّقَفِيِّ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ الْحَنَفِيِّ، عَنْ عَلِيٍّ، أَنَّ أُكَيْدِرَ، دُومَةَ أَهْدَى إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ثَوْبَ حَرِيرٍ فَأَعْطَاهُ عَلِيًّا فَقَالَ ‏"‏ شَقِّقْهُ خُمُرًا بَيْنَ الْفَوَاطِمِ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ أَبُو بَكْرٍ وَأَبُو كُرَيْبٍ ‏"‏ بَيْنَ النِّسْوَةِ ‏"‏ ‏.‏
Ali reported that Ukaidir of Duma presented to Allah's Apostle (ﷺ) a silk garment, and he presented it to 'Ali. and said:Tear it to make head covering for Fitimas out of it. This tradition is transmitted on the authority of Abu Bakr, and Abu Kuraib said: Among the women

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · The Book of Clothes and Adornment

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।