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सहीह मुस्लिम

नंबर 4814

नंबर 4814किताब 33, नंबर 111अरबी नंबरिंग 1856.08
وَحَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ، عُثْمَانُ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، حَدَّثَنِي سَالِمُ بْنُ أَبِي الْجَعْدِ، قَالَ قُلْتُ لِجَابِرٍ كَمْ كُنْتُمْ يَوْمَئِذٍ قَالَ أَلْفًا وَأَرْبَعَمِائَةٍ ‏.‏
It has been narrated (through a different chain of transmitters) on the authority of Salim b. al-Ja'd who said:I asked Jabir: How many were you on the Day of Hudaibiya? He said: One thousand and four hundred

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।