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सहीह मुस्लिम

नंबर 4815

नंबर 4815किताब 33, नंबर 112अरबी नंबरिंग 1857.01
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَمْرٍو، - يَعْنِي ابْنَ مُرَّةَ - حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي أَوْفَى، قَالَ كَانَ أَصْحَابُ الشَّجَرَةِ أَلْفًا وَثَلاَثَمِائَةٍ وَكَانَتْ أَسْلَمُ ثُمُنَ الْمُهَاجِرِينَ ‏.‏
It has been narrated on the authority of 'Abdullah b. Abu Aufa who said:The Companions of the Tree (i e. those who swore fealty under the tree) were one thousand and three hundred, and the people of Aslam tribe were one-eighth of the Muhajirs

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।