وَحَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا مُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ كَهْمَسٍ، عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّهُ قَالَ غَزَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سِتَّ عَشْرَةَ غَزْوَةً .
It has been narrated by Buraida who heard it from his father that he joined the Messenger of Allah (ﷺ) in sixteen military campaigns
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।