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सहीह मुस्लिम

नंबर 4695

नंबर 4695किताब 32, नंबर 177अरबी नंबरिंग 1814.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ، ح وَحَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مُحَمَّدٍ، الْجَرْمِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو تُمَيْلَةَ، قَالاَ جَمِيعًا حَدَّثَنَا حُسَيْنُ بْنُ وَاقِدٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، ‏.‏ قَالَ غَزَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم تِسْعَ عَشْرَةَ غَزْوَةً قَاتَلَ فِي ثَمَانٍ مِنْهُنَّ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ أَبُو بَكْرٍ مِنْهُنَّ ‏.‏ وَقَالَ فِي حَدِيثِهِ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Buraida (who heard the tradition from his father) that the Messenger of Allah (ﷺ) conducted nineteen military campaigns and he (actually) fought in eight of them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।