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सहीह मुस्लिम

नंबर 4550

नंबर 4550किताब 32, नंबर 31अरबी नंबरिंग 1745.02
حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُبَيْدِ، اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ الصَّعْبِ بْنِ جَثَّامَةَ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نُصِيبُ فِي الْبَيَاتِ مِنْ ذَرَارِيِّ الْمُشْرِكِينَ قَالَ ‏ "‏ هُمْ مِنْهُمْ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated by Sa'b b. Jaththama that he said (to the Holy Prophet):Messenger of Allah, we kill the children of the polytheists during the night raids. He said: They are from them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।