सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4549

नंबर 4549किताब 32, नंबर 30अरबी नंबरिंग 1745.01
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَسَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ الصَّعْبِ، بْنِ جَثَّامَةَ قَالَ سُئِلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَنِ الذَّرَارِيِّ مِنَ الْمُشْرِكِينَ يُبَيَّتُونَ فَيُصِيبُونَ مِنْ نِسَائِهِمْ وَذَرَارِيِّهِمْ ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ هُمْ مِنْهُمْ ‏"‏ ‏.‏
It is reported on the authority of Sa'b b. Jaththama that the Prophet of Allah (ﷺ), when asked about the women and children of the polytheists being killed during the night raid, said:They are from them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।