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सहीह मुस्लिम

नंबर 4490

नंबर 4490किताब 30, नंबर 21अरबी नंबरिंग 1717.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، بْنِ أَبِي بَكْرَةَ ‏.‏ قَالَ كَتَبَ أَبِي - وَكَتَبْتُ لَهُ - إِلَى عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرَةَ وَهُوَ قَاضٍ بِسِجِسْتَانَ أَنْ لاَ، تَحْكُمَ بَيْنَ اثْنَيْنِ وَأَنْتَ غَضْبَانُ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ يَحْكُمْ أَحَدٌ بَيْنَ اثْنَيْنِ وَهُوَ غَضْبَانُ ‏"‏ ‏.‏
Abd al-Rahman b. Abu Bakra reported:My father dictated (and I wrote for him) to Ubaidullah b. Abu Bakra while he was the judge of Sijistan: Do not judge between two persons when you are angry, for I have heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying: None of you should judge between two persons when he is angry

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · The Book of Judicial Decisions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।