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सहीह मुस्लिम

नंबर 4489

नंबर 4489किताब 30, नंबर 20अरबी नंबरिंग 1716.03
وَحَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، أَخْبَرَنَا مَرْوَانُ، - يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدٍ الدِّمَشْقِيَّ - حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، حَدَّثَنِي يَزِيدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أُسَامَةَ بْنِ الْهَادِ اللَّيْثِيُّ، بِهَذَا الْحَدِيثِ مِثْلَ رِوَايَةِ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ مُحَمَّدٍ بِالإِسْنَادَيْنِ جَمِيعًا ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Usama b. al-Had al-Laithi

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · The Book of Judicial Decisions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।