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सहीह मुस्लिम

नंबर 3973

नंबर 3973किताब 22, नंबर 12अरबी नंबरिंग 1553.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْغُبَرِيُّ، - وَاللَّفْظُ لِيَحْيَى - قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا مِنْ مُسْلِمٍ يَغْرِسُ غَرْسًا أَوْ يَزْرَعُ زَرْعًا فَيَأْكُلُ مِنْهُ طَيْرٌ أَوْ إِنْسَانٌ أَوْ بَهِيمَةٌ إِلاَّ كَانَ لَهُ بِهِ صَدَقَةٌ ‏"‏ ‏.‏
Anas reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying Never does a Muslim plant trees or cultivate land and birds or a man or a beast eat out of them but that is a charity on his behalf

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।