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सहीह मुस्लिम

नंबर 3972

नंबर 3972किताब 22, नंबर 11अरबी नंबरिंग 1552.05
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، وَإِسْحَاقُ، بْنُ إِبْرَاهِيمَ جَمِيعًا عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ، ح وَحَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا عَمَّارُ بْنُ مُحَمَّدٍ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، كُلُّ هَؤُلاَءِ عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ، ‏.‏ زَادَ عَمْرٌو فِي رِوَايَتِهِ عَنْ عَمَّارٍ، وَأَبُو كُرَيْبٍ فِي رِوَايَتِهِ عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ، فَقَالاَ عَنْ أُمِّ مُبَشِّرٍ، وَفَى رِوَايَةِ ابْنِ فُضَيْلٍ عَنِ امْرَأَةِ، زَيْدِ بْنِ حَارِثَةَ وَفِي رِوَايَةِ إِسْحَاقَ عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ، قَالَ رُبَّمَا قَالَ عَنْ أُمِّ مُبَشِّرٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وَرُبَّمَا لَمْ يَقُلْ وَكُلُّهُمْ قَالُوا عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِنَحْوِ حَدِيثِ عَطَاءٍ وَأَبِي الزُّبَيْرِ وَعَمْرِو بْنِ دِينَارٍ ‏.‏
This hadith is transmitted on the authority of Abu Muawiya (but With a slight change of words)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Musaqah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।