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सहीह मुस्लिम

नंबर 3553

नंबर 3553किताब 16, नंबर 155अरबी नंबरिंग 1438.10
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ الْقَوَارِيرِيُّ، وَأَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ، قَالَ ابْنُ عَبْدَةَ أَخْبَرَنَا وَقَالَ، عُبَيْدُ اللَّهِ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ قَزَعَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، الْخُدْرِيِّ قَالَ ذُكِرَ الْعَزْلُ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ وَلِمَ يَفْعَلُ ذَلِكَ أَحَدُكُمْ - وَلَمْ يَقُلْ فَلاَ يَفْعَلْ ذَلِكَ أَحَدُكُمْ - فَإِنَّهُ لَيْسَتْ نَفْسٌ مَخْلُوقَةٌ إِلاَّ اللَّهُ خَالِقُهَا ‏"‏ ‏.‏
Abu Sa'id al-Khudri (Allah be pleased with him) reported:Mention was made about al-'azl in the presence of Allah's Messenger (ﷺ), whereupon he said: Why any one of you practises it? (He did not say: One of you should not do it), for there is no created soul, whose creator is not Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।