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सहीह मुस्लिम

नंबर 3552

नंबर 3552किताब 16, नंबर 154अरबी नंबरिंग 1438.09
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنْ مَعْبَدِ، بْنِ سِيرِينَ قَالَ قُلْنَا لأَبِي سَعِيدٍ هَلْ سَمِعْتَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَذْكُرُ فِي الْعَزْلِ شَيْئًا قَالَ نَعَمْ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمَعْنَى حَدِيثِ ابْنِ عَوْنٍ إِلَى قَوْلِهِ ‏ "‏ الْقَدَرُ ‏"‏ ‏.‏
Ma'bad b. Sirin said to Abu Sa'id (Allah be pleased with him):Did you hear Allah's Messenger (ﷺ) making a mention of something in regard to al-'azl? Thereupon he said: Yes. The rest (of the hadith is the same)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।