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सहीह मुस्लिम

नंबर 2795

नंबर 2795किताब 15, नंबर 5अरबी नंबरिंग 1178.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ يَعْنِي ابْنَ جَعْفَرٍ، ح وَحَدَّثَنِي أَبُو غَسَّانَ الرَّازِيُّ، حَدَّثَنَا بَهْزٌ، قَالاَ جَمِيعًا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ أَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَخْطُبُ بِعَرَفَاتٍ ‏.‏ فَذَكَرَ هَذَا الْحَدِيثَ ‏.‏
Amr b. Dinar narrated with the same chain of transmitters that he heard the Messenger of Allah (ﷺ) delivering sermon at 'Arafat, and he made a mention of this hadith (as quoted above)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।