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सहीह मुस्लिम

नंबर 2794

नंबर 2794किताब 15, नंबर 4अरबी नंबरिंग 1178.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَأَبُو الرَّبِيعِ الزَّهْرَانِيُّ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، جَمِيعًا عَنْ حَمَّادٍ، - قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، - عَنْ عَمْرٍو، عَنْ جَابِرِ بْنِ زَيْدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، - رضى الله عنهما - قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ يَخْطُبُ يَقُولُ ‏ "‏ السَّرَاوِيلُ لِمَنْ لَمْ يَجِدِ الإِزَارَ وَالْخُفَّانِ لِمَنْ لَمْ يَجِدِ النَّعْلَيْنِ ‏"‏ ‏.‏ يَعْنِي الْمُحْرِمَ ‏.‏
Ibn 'Abbas (Allah be pleased with both of them) reported:I heard Allah's Messenger (ﷺ) say as he was delivering an address: So far as the trousers are concerned, one who does not find lower garment, he may wear them; as also socks, he may wear them who does not find shoes. It concerns the Muhrim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।