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सहीह मुस्लिम

नंबर 2796

नंबर 2796किताब 15, नंबर 6अरबी नंबरिंग 1178.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، ح وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، ح وَحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ، أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، ح وَحَدَّثَنِي عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، عَنْ أَيُّوبَ، كُلُّ هَؤُلاَءِ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَلَمْ يَذْكُرْ أَحَدٌ مِنْهُمْ يَخْطُبُ بِعَرَفَاتٍ ‏.‏ غَيْرُ شُعْبَةَ وَحْدَهُ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of 'Amr b. Dinar with the same chain of transmitters, but none of them (the narrators) made a mention that he (the Holy Prophet) was delivering address at 'Arafat except Shu'ba

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।