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सहीह मुस्लिम

नंबर 2402

नंबर 2402किताब 12, नंबर 139अरबी नंबरिंग 1042.03
حَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، وَيُونُسُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرُو، بْنُ الْحَارِثِ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي عُبَيْدٍ، مَوْلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لأَنْ يَحْتَزِمَ أَحَدُكُمْ حُزْمَةً مِنْ حَطَبٍ فَيَحْمِلَهَا عَلَى ظَهْرِهِ فَيَبِيعَهَا خَيْرٌ لَهُ مِنْ أَنْ يَسْأَلَ رَجُلاً يُعْطِيهِ أَوْ يَمْنَعُهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:It is better for any one of you to tie a bundle of firewood and carry it on his back and sell it than to beg a person, he may give or may refuse

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।