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सहीह मुस्लिम

नंबर 2403

नंबर 2403किताब 12, नंबर 140अरबी नंबरिंग 1043
حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، وَسَلَمَةُ بْنُ شَبِيبٍ، - قَالَ سَلَمَةُ حَدَّثَنَا وَقَالَ الدَّارِمِيُّ، أَخْبَرَنَا مَرْوَانُ، وَهُوَ ابْنُ مُحَمَّدٍ الدِّمَشْقِيُّ - حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ - عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلاَنِيِّ، عَنْ أَبِي مُسْلِمٍ الْخَوْلاَنِيِّ، قَالَ حَدَّثَنِي الْحَبِيبُ الأَمِينُ، أَمَّا هُوَ فَحَبِيبٌ إِلَىَّ وَأَمَّا هُوَ عِنْدِي فَأَمِينٌ عَوْفُ بْنُ مَالِكٍ الأَشْجَعِيُّ قَالَ كُنَّا عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم تِسْعَةً أَوْ ثَمَانِيَةً أَوْ سَبْعَةً فَقَالَ ‏"‏ أَلاَ تُبَايِعُونَ رَسُولَ اللَّهِ ‏"‏ وَكُنَّا حَدِيثَ عَهْدٍ بِبَيْعَةٍ فَقُلْنَا قَدْ بَايَعْنَاكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ ‏.‏ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ أَلاَ تُبَايِعُونَ رَسُولَ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ فَقُلْنَا قَدْ بَايَعْنَاكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ ‏.‏ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ أَلاَ تُبَايِعُونَ رَسُولَ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ فَبَسَطْنَا أَيْدِيَنَا وَقُلْنَا قَدْ بَايَعْنَاكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَعَلاَمَ نُبَايِعُكَ قَالَ ‏"‏ عَلَى أَنْ تَعْبُدُوا اللَّهَ وَلاَ تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَالصَّلَوَاتِ الْخَمْسِ وَتُطِيعُوا - وَأَسَرَّ كَلِمَةً خَفِيَّةً - وَلاَ تَسْأَلُوا النَّاسَ شَيْئًا ‏"‏ ‏.‏ فَلَقَدْ رَأَيْتُ بَعْضَ أُولَئِكَ النَّفَرِ يَسْقُطُ سَوْطُ أَحَدِهِمْ فَمَا يَسْأَلُ أَحَدًا يُنَاوِلُهُ إِيَّاهُ ‏.‏
अबू मुस्लिम ख़ौलानी से रिवायत है, वह कहते हैं : मुझे दोस्त और अमानतदार ने बताया है, वह मेरे निकट दोस्त भी है और अमानतदार भी, यानी औफ़ बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु ने मुझे बताया है : "हम नौ, आठ या सात लोग अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास थे कि इसी बीच आपने कहा : "क्या तुम अल्लाह के रसूल से बैअत (अर्थात; निष्ठा की प्रतिज्ञा) नहीं करोगे?" चूँकि हमने कुछ दिन पहले ही आपसे बैअत की थी, इसलिए उत्तर दिया : ऐ अल्लाह के रसूल, हम तो आपसे बैअत कर चुके हैं। आपने फिर कहा : "क्या तुम अल्लाह के रसूल से बैअत नहीं करोगे?" हमने उत्तर दिया : ऐ अल्लाह के रसूल, हम तो आपसे बैअत कर चुके हैं। लेकिन, आपने फिर कहा : "क्या तुम अल्लाह के रसूल से बैअत नहीं करोगे?" अतः, हमने हाथ फैला दिए और कहा : हमने आपसे बैअत कर ली, लेकिन किस बात पर बैअत करें? फ़रमाया : "इस बात पर कि केवल अल्लाह की इबादत करोगे, किसी को उसका साझी नहीं बनाओगे, पाँच वक्त की नमाज़ें पढ़ोगे और अल्लाह का अनुसरण करोगे। -तथा धीरे से एक बात कही- और लोगों से कुछ नहीं माँगोगे।" चुनांचे मैंने उनमें से कुछ लोगों को देखा कि उनका कोड़ा गिर जाता तो किसी से उठाकर देने तक नहीं कहते थे।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।