सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 2391

नंबर 2391किताब 12, नंबर 128अरबी नंबरिंग 1038.02
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ الْمَكِّيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، حَدَّثَنِي وَهْبُ بْنُ، مُنَبِّهٍ - وَدَخَلْتُ عَلَيْهِ فِي دَارِهِ بِصَنْعَاءَ فَأَطْعَمَنِي مِنْ جَوْزَةٍ فِي دَارِهِ - عَنْ أَخِيهِ قَالَ سَمِعْتُ مُعَاوِيَةَ بْنَ أَبِي سُفْيَانَ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏.‏ فَذَكَرَ مِثْلَهُ ‏.‏
Amr b. Dinar reported from Wahb b. Munabbih:I went to his house in San'a' and he offered me nuts grown in his house to eat. And his brother said: I heard Mu'awiya b. Abu Sufyan saying that he had heard the Messenger of Allah (ﷺ) as saying, and then he made a mention (of a hadith) like one mentioned above

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।