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सहीह मुस्लिम

नंबर 2390

नंबर 2390किताब 12, नंबर 127अरबी नंबरिंग 1038.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ وَهْبِ بْنِ مُنَبِّهٍ، عَنْ أَخِيهِ، هَمَّامٍ عَنْ مُعَاوِيَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تُلْحِفُوا فِي الْمَسْأَلَةِ فَوَاللَّهِ لاَ يَسْأَلُنِي أَحَدٌ مِنْكُمْ شَيْئًا فَتُخْرِجَ لَهُ مَسْأَلَتُهُ مِنِّي شَيْئًا وَأَنَا لَهُ كَارِهٌ فَيُبَارَكَ لَهُ فِيمَا أَعْطَيْتُهُ ‏"‏ ‏.‏
Mu'awiya reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Do not press in a matter, for I swear by Allah, none of you who asks me for anything and manages to get his request while I disdain it, will he be blessed in that which I give him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।