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सहीह मुस्लिम

नंबर 2392

नंबर 2392किताब 12, नंबर 129अरबी नंबरिंग 1037.02
وَحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ حَدَّثَنِي حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ، قَالَ سَمِعْتُ مُعَاوِيَةَ بْنَ أَبِي سُفْيَانَ، وَهُوَ يَخْطُبُ يَقُولُ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ يُرِدِ اللَّهُ بِهِ خَيْرًا يُفَقِّهْهُ فِي الدِّينِ وَإِنَّمَا أَنَا قَاسِمٌ وَيُعْطِي اللَّهُ ‏"‏ ‏.‏
Abd al-Rahman b. Auf reported:I heard Mu'awiya b. Abu Sufyan saying in an address that he had heard the Messenger of Allah (ﷺ) as saying: He to whom Allah intends to do good, He gives him insight into religion. And I am only the distributor while Allah is the Bestower

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।