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सहीह मुस्लिम

नंबर 2343

नंबर 2343किताब 12, नंबर 80अरबी नंबरिंग 1014.02
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، - يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْقَارِيَّ - عَنْ سُهَيْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَتَصَدَّقُ أَحَدٌ بِتَمْرَةٍ مِنْ كَسْبٍ طَيِّبٍ إِلاَّ أَخَذَهَا اللَّهُ بِيَمِينِهِ فَيُرَبِّيهَا كَمَا يُرَبِّي أَحَدُكُمْ فَلُوَّهُ أَوْ قَلُوصَهُ حَتَّى تَكُونَ مِثْلَ الْجَبَلِ أَوْ أَعْظَمَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:No one gives Sadaqa of a date out of his honest earning, but Allah accepts it with His Right Hand, and then fosters it as one of you fosters the colt or a young she-camel, till it becomes like a mountain or even greater

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।