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सहीह मुस्लिम

नंबर 2344

नंबर 2344किताब 12, नंबर 81अरबी नंबरिंग 1014.03
وَحَدَّثَنِي أُمَيَّةُ بْنُ بِسْطَامَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ، - يَعْنِي ابْنَ زُرَيْعٍ - حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ الْقَاسِمِ، ح وَحَدَّثَنِيهِ أَحْمَدُ بْنُ عُثْمَانَ الأَوْدِيُّ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ، حَدَّثَنِي سُلَيْمَانُ، - يَعْنِي ابْنَ بِلاَلٍ - كِلاَهُمَا عَنْ سُهَيْلٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ فِي حَدِيثِ رَوْحٍ ‏"‏ مِنَ الْكَسْبِ الطَّيِّبِ فَيَضَعُهَا فِي حَقِّهَا ‏"‏ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ سُلَيْمَانَ ‏"‏ فَيَضَعُهَا فِي مَوْضِعِهَا ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated through another chain of transmitters with a change of words. In the hadith transmitted Rauh (the words are):" Out of the honest earning and its spending at what is its (due) right" ; and in the hadith transmitted by Sulaiman (the words are):" And its spending at its proper place

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।