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सहीह मुस्लिम

नंबर 493

नंबर 493किताब 1, नंबर 399अरबी नंबरिंग 199.03
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مُحَمَّدٍ، - وَهُوَ ابْنُ زِيَادٍ - قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لِكُلِّ نَبِيٍّ دَعْوَةٌ دَعَا بِهَا فِي أُمَّتِهِ فَاسْتُجِيبَ لَهُ وَإِنِّي أُرِيدُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ أَنْ أُؤَخِّرَ دَعْوَتِي شَفَاعَةً لأُمَّتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: There was for every apostle a prayer with which he prayed for his Ummah and it was granted to him; but I wish, if Allah so wills, to defer my prayer for the intercession of my Ummah on the Day of Resurrection

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।