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सहीह मुस्लिम

नंबर 492

नंबर 492किताब 1, नंबर 398अरबी नंबरिंग 199.02
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ عُمَارَةَ، - وَهُوَ ابْنُ الْقَعْقَاعِ - عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لِكُلِّ نَبِيٍّ دَعْوَةٌ مُسْتَجَابَةٌ يَدْعُو بِهَا فَيُسْتَجَابُ لَهُ فَيُؤْتَاهَا وَإِنِّي اخْتَبَأْتُ دَعْوَتِي شَفَاعَةً لأُمَّتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira said:The Messenger of Allah (ﷺ) said: Every Messenger is endowed with a prayer which is granted and by which he would (pray to his Lord) and it would he granted for him. I have, however, reserved my prayer for the intercession of my Ummab on the Day of Resurrection

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।