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सहीह मुस्लिम

नंबर 494

नंबर 494किताब 1, नंबर 400अरबी नंबरिंग 200.01
حَدَّثَنِي أَبُو غَسَّانَ الْمِسْمَعِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ حَدَّثَانَا - وَاللَّفْظُ، لأَبِي غَسَّانَ - قَالُوا حَدَّثَنَا مُعَاذٌ، - يَعْنُونَ ابْنَ هِشَامٍ - قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لِكُلِّ نَبِيٍّ دَعْوَةٌ دَعَاهَا لأُمَّتِهِ وَإِنِّي اخْتَبَأْتُ دَعْوَتِي شَفَاعَةً لأُمَّتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported:Verily the Messenger of Allah (ﷺ) said: There is for every apostle a prayer with which he prays (to Allah) for his Ummah. I have reserved my prayer for the intercession of my Ummah on the Day of Resurrection

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।