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सहीह मुस्लिम

नंबर 316

नंबर 316किताब 1, नंबर 223अरबी नंबरिंग 119.03
وَحَدَّثَنِيهِ أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدِ بْنِ صَخْرٍ الدَّارِمِيُّ، حَدَّثَنَا حَبَّانُ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ الْمُغِيرَةِ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏ لاَ تَرْفَعُوا أَصْوَاتَكُمْ فَوْقَ صَوْتِ النَّبِيِّ‏}‏ وَلَمْ يَذْكُرْ سَعْدَ بْنَ مُعَاذٍ فِي الْحَدِيثِ ‏.‏
This hadith is also transmitted by Ahmad b. Sa'id, Habban, Sulaiman b. Mughira on the authority of Anas who said:When the verse was revealed:" Do not raise your voice louder than the voice of the Apostle," no mention was made of Sa'd b, Mu'adh in it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।