सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 315

नंबर 315किताब 1, नंबर 222अरबी नंबरिंग 119.02
وَحَدَّثَنَا قَطَنُ بْنُ نُسَيْرٍ، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، حَدَّثَنَا ثَابِتٌ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ ثَابِتُ بْنُ قَيْسِ بْنِ شَمَّاسٍ خَطِيبَ الأَنْصَارِ فَلَمَّا نَزَلَتْ هَذِهِ الآيَةُ ‏.‏ بِنَحْوِ حَدِيثِ حَمَّادٍ ‏.‏ وَلَيْسَ فِي حَدِيثِهِ ذِكْرُ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Anas b. Malik by another chain of transmitters in which these words are found:Thabit b. Qais was the orator of the Ansar, when this verse was revealed: the rest of the hadith is the same with the exception that there is no mention of Sa'd b. Mu'adh in it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।