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सहीह मुस्लिम

नंबर 289

नंबर 289किताब 1, नंबर 195अरबी नंबरिंग 104.03
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُطِيعٍ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنْ عِيَاضٍ الأَشْعَرِيِّ، عَنِ امْرَأَةِ أَبِي مُوسَى، عَنْ أَبِي مُوسَى، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ح وَحَدَّثَنِيهِ حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، حَدَّثَنَا دَاوُدُ، - يَعْنِي ابْنَ أَبِي هِنْدٍ - حَدَّثَنَا عَاصِمٌ، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ مُحْرِزٍ، عَنْ أَبِي مُوسَى، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ح وَحَدَّثَنِي الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْحُلْوَانِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ، عَنْ أَبِي مُوسَى، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِهَذَا الْحَدِيثِ ‏.‏ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِ عِيَاضٍ الأَشْعَرِيِّ قَالَ ‏"‏ لَيْسَ مِنَّا ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ ‏"‏ بَرِيءٌ ‏"‏ ‏.‏
This hadith is narrated on the authority of Abu Musa with this change only:That (the Holy Prophet) did not say that he had no concern but said: He is not one of us

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।