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सहीह मुस्लिम

नंबर 290

नंबर 290किताब 1, नंबर 196अरबी नंबरिंग 105.01
وَحَدَّثَنِي شَيْبَانُ بْنُ فَرُّوخَ، وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ أَسْمَاءَ الضُّبَعِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا مَهْدِيٌّ، - وَهُوَ ابْنُ مَيْمُونٍ - حَدَّثَنَا وَاصِلٌ الأَحْدَبُ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ حُذَيْفَةَ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ رَجُلاً، يَنِمُّ الْحَدِيثَ فَقَالَ حُذَيْفَةُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ نَمَّامٌ ‏"‏ ‏.‏
It is reported from Hudhaifa that news reached him (the Holy Prophet) that a certain man carried tales. Upon this Hudhaifa remarked:I heard Allah's Messenger (ﷺ) saying: The tale-bearer shall not enter Paradise

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।