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सहीह मुस्लिम

नंबर 288

नंबर 288किताब 1, नंबर 194अरबी नंबरिंग 104.02
حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالاَ أَخْبَرَنَا جَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ، أَخْبَرَنَا أَبُو عُمَيْسٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا صَخْرَةَ، يَذْكُرُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ، وَأَبِي، بُرْدَةَ بْنِ أَبِي مُوسَى قَالاَ أُغْمِيَ عَلَى أَبِي مُوسَى وَأَقْبَلَتِ امْرَأَتُهُ أُمُّ عَبْدِ اللَّهِ تَصِيحُ بِرَنَّةٍ ‏.‏ قَالاَ ثُمَّ أَفَاقَ قَالَ أَلَمْ تَعْلَمِي - وَكَانَ يُحَدِّثُهَا - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَنَا بَرِيءٌ مِمَّنْ حَلَقَ وَسَلَقَ وَخَرَقَ ‏"‏ ‏.‏
It is narrated on the authority of Abu Burda that Abu Musa fell unconscious and his wife Umm Abdullah came there and wailed loudly. When he felt relief he said:Don't you know? -and narrated to her: Verily the Messenger of Allah (ﷺ) said: I have no concern with one who shaved her hair, lamented loudly and tore (her clothes in grief)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।