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सुनन इब्न माजा

नंबर 1768

नंबर 1768किताब 7, नंबर 131
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ الزُّهْرِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ عُبَيْدِ بْنِ نِسْطَاسٍ، عَنْ أَبِي الضُّحَى، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِذَا دَخَلَتِ الْعَشْرُ أَحْيَا اللَّيْلَ وَشَدَّ الْمِئْزَرَ وَأَيْقَظَ أَهْلَهُ ‏.‏
It was narrated that ‘Aishah said:“When the last ten days of Ramadan began, the Prophet (ﷺ) used to stay up at night, tighten his waist- wrap, and wake up his family (to pray).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।