حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ، وَأَبُو إِسْحَاقَ الْهَرَوِيُّ إِبْرَاهِيمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حَاتِمٍ قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ النَّخَعِيِّ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَجْتَهِدُ فِي الْعَشْرِ الأَوَاخِرِ مَا لاَ يَجْتَهِدُ فِي غَيْرِهِ .
It was narrated that ‘Aishah said:“The Prophet (ﷺ) used to strive hard (in worship) in the last ten nights of Ramadan as he never did at any other time.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।