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सुनन इब्न माजा

नंबर 819

नंबर 819किताब 5, नंबर 17
حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ، بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، عَنْ حَجَّاجٍ الصَّوَّافِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي قَتَادَةَ، وَعَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي قَتَادَةَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُصَلِّي بِنَا فَيُطِيلُ فِي الرَّكْعَةِ الأُولَى مِنَ الظُّهْرِ وَيُقْصِرُ فِي الثَّانِيَةِ وَكَذَلِكَ فِي الصُّبْحِ ‏.‏
It was narrated that Abu Qatadah said:“The Messenger of Allah (ﷺ) used to lead us in prayer, and he would lengthen the first Rak’ah of the Zuhr and shorten the second Rak’ah, and he would do likewise in the Subh.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।