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सुनन इब्न माजा

नंबर 820

नंबर 820किताब 5, नंबर 18
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ السَّائِبِ، قَالَ قَرَأَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي صَلاَةِ الصُّبْحِ بـ ‏{الْمُؤْمِنُونَ}‏ فَلَمَّا أَتَى عَلَى ذِكْرِ عِيسَى أَصَابَتْهُ شَرْقَةٌ فَرَكَعَ ‏.‏ يَعْنِي سَعْلَةً ‏.‏
It was narrated that ‘Abdullah bin Sa’ib said:“The Messenger of Allah (ﷺ) recited Al-Mu’minun [Al-Mu’minun 23] in the Subh prayer, and when he came to the mention of ‘Eisa, he was overcome with a cough, so he bowed in Ruku’.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।