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सुनन इब्न माजा

नंबर 1113

नंबर 1113किताब 5, नंबर 311
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ ابْنِ عَجْلاَنَ، عَنْ عِيَاضِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ جَاءَ رَجُلٌ وَالنَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَخْطُبُ فَقَالَ ‏"‏ أَصَلَّيْتَ؟‏"‏ ‏.‏ قَالَ: لاَ ‏.‏ قَالَ: ‏"‏ فَصَلِّ رَكْعَتَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Sa’eed said:“A man entered the mosque when the Prophet (ﷺ) was delivering the sermon. He said: ‘Have you prayed?’ He said: ‘No.’ He said: ‘Then pray two Rak’ah.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।