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सुनन इब्न माजा

नंबर 1112

नंबर 1112किताब 5, नंबर 310
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، سَمِعَ جَابِرًا، وَأَبُو الزُّبَيْرِ، سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ دَخَلَ سُلَيْكٌ الْغَطَفَانِيُّ الْمَسْجِدَ وَالنَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَخْطُبُ ‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ أَصَلَّيْتَ؟ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ: لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَصَلِّ رَكْعَتَيْنِ ‏"‏ ‏.‏ وَأَمَّا عَمْرٌو فَلَمْ يَذْكُرْ سُلَيْكًا ‏.‏
It was narrated that Jabir bin ‘Abdullah said:“Sulaik Ghatafani entered the mosque when the Prophet (ﷺ) was delivering the sermon. He said: ‘Have you prayed?’ He said: ‘No.’ He said: ‘Then perform two Rak’ah.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।