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सुनन इब्न माजा

नंबर 1114

नंबर 1114किताब 5, नंबर 312
حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ رُشَيْدٍ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، وَعَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ، قَالاَ جَاءَ سُلَيْكٌ الْغَطَفَانِيُّ وَرَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَخْطُبُ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏"‏ أَصَلَّيْتَ رَكْعَتَيْنِ قَبْلَ أَنْ تَجِيءَ؟ ‏"‏ قَالَ: لاَ ‏.‏ قَالَ: ‏"‏ فَصَلِّ رَكْعَتَيْنِ وَتَجَوَّزْ فِيهِمَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Jabir said:“Sulaik Al-Ghatafani came while the Messenger of Allah (ﷺ) was delivering the sermon. The Prophet (ﷺ) said to him: ‘Did you perform two Rak’ah before you came?’ He said: ‘No.’ He said: ‘Then perform two Rak’ah, but make them brief.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAl-Albani
  • ShadhMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • ShadhShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।