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सुनन इब्न माजा

नंबर 1074

नंबर 1074किताब 5, नंबर 272
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، وَقَرَأْتُهُ، عَلَيْهِ أَنْبَأَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، أَخْبَرَنِي عَطَاءٌ، حَدَّثَنِي جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، فِي أُنَاسٍ مَعِي قَالَ قَدِمَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ مَكَّةَ صُبْحَ رَابِعَةٍ مَضَتْ مِنْ شَهْرِ ذِي الْحِجَّةِ ‏.‏
‘Ata’ narrated:“Jabir bin ‘Abdullah, who was among the people with me, told me that the Prophet (ﷺ) arrived in Makkah in the morning of the fourth day of Dhul-Hijjah.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।