सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 1075

नंबर 1075किताब 5, नंबर 273
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ، حَدَّثَنَا عَاصِمٌ الأَحْوَلُ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ أَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ تِسْعَةَ عَشَرَ يَوْمًا يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ، فَنَحْنُ إِذَا أَقَمْنَا تِسْعَةَ عَشَرَ يَوْمًا، نُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ، فَإِذَا أَقَمْنَا أَكْثَرَ مِنْ ذَلِكَ، صَلَّيْنَا أَرْبَعًا ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Abbas said:“The Messenger of Allah (ﷺ) stayed for nineteen days in which he shortened his prayer to two Rak’ah. So, whenever we stayed for nineteen days we would shorten our prayer to two Rak’ah, but if we stayed more than that we would pray four Rak’ah.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।