सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 1073

नंबर 1073किताब 5, नंबर 271
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حُمَيْدٍ الزُّهْرِيِّ، قَالَ سَأَلْتُ السَّائِبَ بْنَ يَزِيدَ مَاذَا سَمِعْتَ فِي، سُكْنَى مَكَّةَ قَالَ سَمِعْتُ الْعَلاَءَ بْنَ الْحَضْرَمِيِّ، يَقُولُ قَالَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ ثَلاَثًا لِلْمُهَاجِرِ بَعْدَ الصَّدَرِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that ‘Abdur-Rahman bin Humaid Az-Zuhri said:“I asked Sa’ib bin Yazid: ‘What have you heard about staying in Makkah?’ He said: ‘I heard ‘Ala’ bin Hadrami say: “The Prophet (ﷺ) said: ‘Three (days) for the Muhajir after departing (from Mina).’”* * The meaning of it is: being hished from the rites (of Hajj)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।