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सुनन इब्न माजा

नंबर 4272

नंबर 4272किताब 37, नंबर 173
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ حَفْصٍ الأُبُلِّيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ إِذَا أُدْخِلَ الْمَيِّتُ الْقَبْرَ مُثِّلَتِ الشَّمْسُ لَهُ عِنْدَ غُرُوبِهَا فَيَجْلِسُ يَمْسَحُ عَيْنَيْهِ وَيَقُولُ ‏:‏ دَعُونِي أُصَلِّي ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Jabir that the Prophet (ﷺ) said:“When the deceased enters the grave, the sun is made to appear as if it is setting. He sits up, wipes his eyes and says: ‘Let me pray.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।