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सुनन इब्न माजा

नंबर 4271

नंबर 4271किताब 37, नंबर 172
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، أَنْبَأَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ كَعْبٍ الأَنْصَارِيِّ، أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَاهُ كَانَ يُحَدِّثُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ إِنَّمَا نَسَمَةُ الْمُؤْمِنِ طَائِرٌ يَعْلُقُ فِي شَجَرِ الْجَنَّةِ حَتَّى يَرْجِعَ إِلَى جَسَدِهِ يَوْمَ يُبْعَثُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Abdur-Rahman bin Ka’b Al-Ansari that his father used to narrate that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“The believer’s soul is a bird that eats from the trees of Paradise, until it will be returned to his body on the Day when he is resurrected.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।