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सुनन इब्न माजा

नंबर 4273

नंबर 4273किताब 37, नंबर 174
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبَّادُ بْنُ الْعَوَّامِ، عَنْ حَجَّاجٍ، عَنْ عَطِيَّةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ إِنَّ صَاحِبَىِ الصُّورِ بِأَيْدِيهِمَا - أَوْ فِي أَيْدِيهِمَا - قَرْنَانِ يُلاَحِظَانِ النَّظَرَ مَتَى يُؤْمَرَانِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Sa’eed that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“The two who are entrusted with the Trumpet have two horns in their hands, waiting until they will be commanded (to blow them).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • MunkarMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।