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सुनन इब्न माजा

नंबर 3698

नंबर 3698किताब 33, नंबर 42
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ مُسْلِمٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّهُ أَتَى النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ نَاسٌ مِنَ الْيَهُودِ فَقَالُوا السَّامُ عَلَيْكَ يَا أَبَا الْقَاسِمِ ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ وَعَلَيْكُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Aishah that some of the Jews came to the Prophet(ﷺ) and said:"Assam o alaika (death be upon you), O Abul-Qasim!" He said: "Wa 'alayikum (and also upon you)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।