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सुनन इब्न माजा

नंबर 3697

नंबर 3697किताब 33, नंबर 41
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ إِذَا سَلَّمَ عَلَيْكُمْ أَحَدٌ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ فَقُولُوا وَعَلَيْكُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Anas bin Malik said "the Messenger of Allah(ﷺ) said":"When any of the People of the Book greets you with Salam (peace), then say, Wa 'alaikum(and also upon you)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।