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सुनन इब्न माजा

नंबर 3248

नंबर 3248किताब 28, नंबर 49
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الأَزْهَرِ النَّيْسَابُورِيُّ، حَدَّثَنَا الْهَيْثَمُ بْنُ جَمِيلٍ، حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ مَنْ يَأْكُلُ الْغُرَابَ وَقَدْ سَمَّاهُ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ فَاسِقًا ‏"‏ ‏.‏ وَاللَّهِ مَا هُوَ مِنَ الطَّيِّبَاتِ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Umar said:“Who eats crows? The Messenger of Allah (ﷺ) called them vermin, By Allah, they are not from among the good and permissible things.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 28 · Chapters on Hunting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।