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सुनन इब्न माजा

नंबर 3175

नंबर 3175किताब 27, नंबर 14
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ صَيْفِيٍّ، قَالَ ذَبَحْتُ أَرْنَبَيْنِ بِمَرْوَةٍ فَأَتَيْتُ بِهِمَا النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَأَمَرَنِي بِأَكْلِهِمَا ‏.‏
It was narrated that Muhammad bin Saifi said:“I slaughtered two rabbits with a sharp-edges stone and brought them to the Prophet (ﷺ), and he told me to eat them.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · Chapters on Slaughtering

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।