حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ مُحَارِبِ بْنِ دِثَارٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلاَةٍ فَلَمَّا كَانَ يَوْمُ فَتْحِ مَكَّةَ صَلَّى الصَّلَوَاتِ كُلَّهَا بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ .
Sulaiman bin Buraidah narrated from his father that:The Prophet used to perform ablution for every prayer, but on the day of the conquest of Makkah, he performed all of the prayers with one ablution
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।