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तशरीह के साथ हदीसें

भाग्य एवं नियति के मसायल

9 हदीसें

जिसके साथ अल्लाह भलाई का इरादा करता है, उसे मुसीबतों में डालकर आज़माता है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «مَنْ يُرِدِ اللهُ بِهِ خَيْرًا يُصِبْ مِنْهُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसके साथ अल्लाह भलाई का इरादा करता है, उसे मुसीबतों में डालकर आज़माता है।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि अल्लाह जब अपने किसी मोमिन बंदे के साथ भलाई का इरादा करता है, तो उसे उसकी जान, माल और परिवार से संबंधित किसी परेशानी में डालकर आज़माता है, क्योंकि इसके नतीजे में बंदा अल्लाह से गिड़गिड़ाकर दुआ करता है, बंदे के गुनाह माफ़ हो जाते हैं और उसके दर्जे ऊँचे कर दिए जाते हैं।

फ़ायदे
  1. मोमिन को तरह-तरह की आज़माइशों का सामना करना पड़ता है।
  2. आज़माइश कभी-कभी बंदे से अल्लाह के प्रेम की निशानी होती है। अल्लाह बंदे को इस उद्देश्य से आज़माता है कि उसका दर्जा ऊँचा कर दे और उसके गुनाह माफ़ कर दे।
  3. कठिनाइयों एवं परीक्षा के समय धैर्य रखने और न घबराने की प्रेरणा।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 115) (5645). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 509). بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (1/ 98). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص45). نزهة المتقين، مجموعة من المشايخ (1/ 71). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (1/ 244). مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي القاري (3/ 1127).

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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुसीबत के समय चीख़-चीख़ कर रोने वाली, बाल मुँडवाने वाली और कपड़े फाड़ने वाली औरतों से अपने बरी होने का एलान किया है।

عَن أَبِي بُرْدَةَ بْنِ أَبِي مُوسَى رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: وَجِعَ أَبُو مُوسَى وَجَعًا شَدِيدًا، فَغُشِيَ عَلَيْهِ وَرَأْسُهُ فِي حَجْرِ امْرَأَةٍ مِنْ أَهْلِهِ، فَلَمْ يَسْتَطِعْ أَنْ يَرُدَّ عَلَيْهَا شَيْئًا، فَلَمَّا أَفَاقَ، قَالَ: أَنَا بَرِيءٌ مِمَّنْ بَرِئَ مِنْهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَرِئَ مِنَ الصَّالِقَةِ وَالحَالِقَةِ وَالشَّاقَّةِ.
अबू बुरदा बिन अबू मूसा से -रज़ियल्लाहु अनहु- से रिवायत है, वह कहते हैं : अबू मूसा -रज़ियल्लाहु अनहु- बहुत ज़्यादा बीमार हो गए। और (बीमारी इतनी सख़्त थी कि) बेहोश हो गए। उनका सर उनके घर की एक औरत की गोद में था, (जो ऊँची आवाज़ में रो रही थी) और वह (बेहोशी के कारण) उसे कोई जवाब न दे सके। अतः जब होश में आए, तो फ़रमाया : मैं उन तमाम लोगों से अपने बरी होने का एलान करता हूँ, जिनसे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बरी होने का एलान किया है। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुसीबत के समय चीख़-चीख़ कर रोने वाली, बाल मुँडवाने वाली और कपड़े फाड़ने वाली औरतों से अपने बरी होने का एलान किया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अबू बुरदा रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि उनके पिता अबू मूसा अश'अरी रज़ियल्लाहु अनहु एक बार बहुत बीमार हो गए। बीमारी इतनी सख़्त थी कि वह बेहोश हो गए। उस समय उनका सर उनके घर की किसी महिला की गोद में था, जो उनकी बीमारी देखकर चीख़-चीख़कर रोने लगी। लेकिन, बेहोशी के कारण वह उसे कुछ कह नहीं सके। जब होश में आए, तो फ़रमाया : मैं उन तमाम लोगों से बरी होने का ऐलान करता हूँ, जिनसे ख़ुद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बरी होने की बात कही है। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने निम्नलिखित स्त्रियों से बरी होने का इज़हार किया है : सालिक़ा : मुसीबत के समय चीख़-चीख़कर रोने वाली स्त्री। हालिक़ा : मुसीबत के मसय बाल मुड़वाने वाली स्त्री। शाक़्क़ा : मुसीबत के समय कपड़े फाड़ने वाली स्त्री। कारण यह है कि ये अज्ञानता काल के कार्य हैं। इस्लाम का आदेश यह है कि मुसीबतों के समय सब्र से काम लिया जाए और अल्लाह से प्रतिफल की आशा रखी जाए।

फ़ायदे
  1. मुसीबत के समय कपड़ा फाड़ने, बाल मुंडवाने और ऊँची आवाज़ में रोने की मनाही। ये बड़े गुनाह हैं।
  2. दुःख प्रकट करना और रोना हराम नहीं है, जब तक आवाज़ ऊँची न हो और विलाप न हो। यह अल्लाह के निर्णय को धैर्य के साथ सहन करने के विपरीत नहीं है। यह दरअसल दया है।
  3. अल्लाह के कष्टदायक निर्णयों पर कथन अथवा कार्य द्वारा असंतोष और क्रोध व्यक्त करना हराम है।
  4. मुसीबत के समय सब्र से काम लेना ज़रूरी है।
हवाला

صحيح البخاري (2/ 81) (1296). صحيح مسلم (1/ 100) (104). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص287). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (2/ 371).

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“शक्तिशाली मोमिन कमज़ोर मोमिन के मुकाबले में अल्लाह के समीप अधिक बेहतर तथा प्रिय है, किंतु प्रत्येक के अंदर भलाई है।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «الْمُؤْمِنُ الْقَوِيُّ، خَيْرٌ وَأَحَبُّ إِلَى اللهِ مِنَ الْمُؤْمِنِ الضَّعِيفِ، وَفِي كُلٍّ خَيْرٌ، احْرِصْ عَلَى مَا يَنْفَعُكَ، وَاسْتَعِنْ بِاللهِ وَلَا تَعْجَزْ، وَإِنْ أَصَابَكَ شَيْءٌ، فَلَا تَقُلْ لَوْ أَنِّي فَعَلْتُ كَانَ كَذَا وَكَذَا، وَلَكِنْ قُلْ قَدَرُ اللهِ وَمَا شَاءَ فَعَلَ، فَإِنَّ (لَوْ) تَفْتَحُ عَمَلَ الشَّيْطَانِ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “शक्तिशाली मोमिन कमज़ोर मोमिन के मुकाबले में अल्लाह के समीप अधिक बेहतर तथा प्रिय है, किंतु प्रत्येक के अंदर भलाई है। जो चीज तुम्हारे लिए लाभदायक हो, उसके लिए तत्पर रहो और अल्लाह की मदद मांगो तथा असमर्थता न दिखाओ। फिर यदि तुम्हें कोई विपत्ति पहुँचे, तो यह न कहो कि यदि मैंने ऐसा किया होता, तो ऐसा और ऐसा होता। बल्कि यह कहो कि "قدر الله وما شاء فعل" (अर्थात् अल्लाह तआला ने ऐसा ही भाग्य में लिख रखा था और वह जो चाहता है, करता है।) क्योंकि ‘अगर’ शब्द शैतान के कार्य का द्वार खोलता है।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि वैसे तो हर मोमिन के अंदर कुछ न कुछ भलाई ज़रूर होती है, लेकिन ईमान, प्रतिज्ञा एवं धन आदि शक्ति के स्रोतों में मज़बूत मोमिन अल्लाह की नज़र में कमज़ोर मोमिन से अच्छा एवं प्रिय है। उसके बाद अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मोमिन को ऐसे साधन अपनाने की वसीयत फ़रमाई, जिनसे यदि अल्लाह पर भरोसा हो और उससे मदद माँगी जाए, तो दुनिया एवं आख़िरत की भलाई प्राप्त हो सकती है। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने विवशता, सुस्ती और दोनों जहानों में लाभकारी साबित होने वाली चीज़ों से पीछे हटने से मना फ़रमाया है। अतः एक मोमिन का तरीक़ा यह हो कि जब वह किसी काम में जो मेहनत होनी चाहिए, वह कर ले, उसके साधन अपना ले, अल्लाह से मदद माँग ले और ख़ैर तलब कर ले, तो उसके बाद सब कुछ अल्लाह के हवाले कर दे और विश्वास रखे कि अल्लाह जो करेगा, अच्छा ही होगा। इसके बाद अगर कोई विपत्ति आ जाए, तो यह न कहे कि : "अगर मैं ऐसा कर लेता, तो ऐसा और ऐसा होता।" क्योंकि यह "अगर" शब्द शैतान के कार्य के द्वार खोल देता है। यानी इन्सान तक़दीर पर एतराज़ और हाथ न लगने वाली चीज़ पर अफ़्सोस शुरू कर देता है। इन्सान को अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी और सब कुछ उसी के हवाले करते हुए बस इतना कहना चाहिए कि यह अल्लाह का फ़ैसला है और अल्लाह ने जो चाहा किया। अतः जो कुछ हुआ अल्लाह के इरादे से हुआ। क्योंकि वह जो चाहता है, करता ही है। उसके फ़ैसले को कोई टाल नहीं सकता, और उसके आदेश को कोई रोक नहीं सकता।

फ़ायदे
  1. ईमान के मामले में लोगों की अलग-अलग श्रेणियाँ होती हैं।
  2. कार्यों में शक्ति दिखना मुसतहब है। क्योंकि शक्ति से वह लाभ प्राप्त हो सकते हैं, जो निर्बलता से प्राप्त हो नहीं सकते।
  3. इन्सान को लाभकारी चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए और हानिकारक चीज़ों से बचना चाहिए।
  4. यह ज़रूरी है कि मोमिन अपने तमाम कामों में अल्लाह से मदद माँगे और अपने ऊपर भरोसा न करे।
  5. तक़दीर का सबूत। तक़दीर साधन अपनाने और मेहनत एवं प्रयास करने के विपरीत नहीं है।
  6. विपत्तियों के समय नाराज़ होकर "अगर" कहने की मनाही तथा यह कि तक़दीर पर आपत्ति करना हराम है।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 2052) (2664). توضيح الأحكام من بلوغ المرام، لعبد الله البسام (7/ 492). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (10/ 338). فتح ذي الجلال والإكرام، لابن عثيمين (6/ 430).

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जब तुम्हें धरती के किसी भाग में ताऊन (प्लेग) फैलने का समाचार मिले, तो वहाँ न जाओ और यदि ऐसी जगह फैले जहाँ तुम (पहले से) उपस्थित हो, तो फिर वहाँ से न भागो।

عن أسامة بن زيد رضي الله عنهما مرفوعاً: «إذا سمعتم الطاعونَ بأرض فلا تدخلوها وإذا وقع بأرض وأنتم فيها فلا تخرجوا منها».
उसामा बिन ज़ैद (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “जब तुम्हें धरती के किसी भाग में ताऊन (प्लेग) फैलने का समाचार मिले, तो वहाँ न जाओ और यदि ऐसी जगह फैले जहाँ तुम (पहले से) उपस्थित हो, तो फिर वहाँ से न भागो।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح البخاري ،للإمام محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - كنوز رياض الصالحين»،لحمد بن ناصر العمار،دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. - منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري تأليف- حمزة محمد قاسم مكتبة دار البيان، دمشق - الجمهورية العربية السورية، مكتبة المؤيد، الطائف - المملكة العربية السعودية-1410 هـ - 1990 م. -دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين/محمد علي بن محمد بن علان البكري -اعتنى بها: خليل مأمون شيحا- دار المعرفة للطباعة والنشر والتوزيع، بيروت – لبنان- الطبعة: الرابعة، 1425 هـ - 2004 م. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ.

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अगर तुम उहुद पर्वत के बराबर भी सोना खर्च कर दो तो अल्लाह उसे ग्रहण नहीं करेगा, जब तक तक़दीर पर ईमान न रखो और इस बात पर विश्वास न रखो कि जो चीज़ तुम्हें मिलने वाली है, वह तुम्हारे हाथ से निकल नहीं सकती और जो तुम्हें नहीं मिलने वाली, वह तुम्हारे हाथ लग नहीं सकती। अगर तुम इसके सिवा किसी और आस्था पर मरोगे तो जहन्नम में प्रवेश करने वालों में शामिल हो जाओगे।

عن ابن الدَّيْلَمِي قال: أتيتُ أُبَيَّ بن كعب فقلتُ: في نفْسي شيء من القدر، فحَدِّثْني بشيء لعل الله يُذْهِبَه مِن قلبي. فقال: «لو أنفقتَ مثل أُحُد ذَهَبًا ما قَبِلَه الله منك حتى تؤمن بالقدَر، وتعلمَ أنَّ ما أصابك لم يكن ليُخطِئك، وما أخْطأك لم يكن لِيُصِيبَك، ولو مُتَّ على غير هذا لكنتَ مِن أهل النار». قال: فأتيتُ عبد الله بن مسعود، وحذيفة بن اليمان، وزيد بن ثابت، فكلهم حدَّثني بمثل ذلك عن النبي صلى الله عليه وسلم .
इब्ने दैलमी कहते हैंः मैं उबै बिन काब के पास आकर बोला कि मेरे दिल में तक़दीर के बारे में थोड़ी-सी खटक है। मुझे कोई हदीस सुनाइए कि अल्लाह इस खटक को मेरे दिल से निकाल दे। उन्होंने कहाः अगर तुम उहुद पर्वत के बराबर भी सोना खर्च कर दो तो अल्लाह उसे ग्रहण नहीं करेगा, जब तक तक़दीर पर ईमान न रखो और इस बात पर विश्वास न रखो कि जो चीज़ तुम्हें मिलने वाली है, वह तुम्हारे हाथ से निकल नहीं सकती और जो तुम्हें मिलने वाली नहीं है, वह तुम्हारे हाथ लग नहीं सकती। अगर तुम इसके सिवा किसी और आस्था पर मरोगे तो जहन्नम में प्रवेश करने वालों में शामिल हो जाओगे। वह कहते हैंः मैं इसके बाद अब्दुल्लाह बिन मसऊद, हुज़ैफ़ा बिन यमान और ज़ैद बिन साबित के पास गया तो हर एक ने मुझे अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के हवाले से इस तरह की हदीस सुनाई।
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अब्दुल्लाह बिन फैरोज़ दैलमी -उनपर अल्लाह की कृपा हो- कहते हैं कि उनके दिल में तक़दीर के संबंध में कुछ आशंकाएँ पैदा हुईं, तो उन्हें भय हुआ कि कहीं मामला इसके इनकार तक न पहुँच जाए, अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज्ञानी सहाबा -रज़ियल्लाहु अनहुम- के पास जाकर इस संदेह के निवारण के बारे में पूछा। वैसे, ईमान वालों का यही तरीका होना चाहिए कि जहाँ कोई संदेह पैदा हो, जानकार लोगों से संपर्क करें। यही अल्लाह का आदेश भी हैः "فاسألوا أهل الذكر إن كنتم لا تعلمون" (अगर तुम नहीं जानते, तो जानने वालों से पूछ लिया करो) तब उन सभी सहाबा ने उन्हें बताया कि अल्लाह के निर्णय तथा तक़दीर पर ईमान लाना अवश्यंभावी है। तक़दीर पर ईमान न रखने वाला बड़ी से बड़ी वस्तु भी खर्च कर दे, तो ग्रहण नहीं की जाएगी तथा तक़दीर पर ईमान रखे बिना मरने वाला जहन्नमी है।

हवाला

- سنن أبي داود, أبو داود سليمان بن الأشعث الأزدي السِّجِسْتاني, المحقق: محمد محيي الدين عبد الحميد, المكتبة العصرية، صيدا – بيروت. - سنن ابن ماجه, ابن ماجه أبو عبد الله محمد بن يزيد القزويني، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي, الناشر: دار إحياء الكتب العربية - فيصل عيسى البابي الحلبي. - مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421هـ - 2001م. - مشكاة المصابيح، تأليف: محمد بن عبد الله، التبريزي، تحقيق : محمد ناصر الدين الألباني، الناشر: المكتب الإسلامي، الطبعة: الثالثة، 1985م. - الملخص في شرح كتاب التوحيد، دار العاصمة الرياض، الطبعة: الأولى 1422هـ- 2001م. - الجديد في شرح كتاب التوحيد، مكتبة السوادي، جدة، المملكة العربية السعودية، الطبعة: الخامسة، 1424هـ/2003م.

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अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमसे जो नेक वचन लिए थे कि हम उनमें से किसी में भी आपकी अवज्ञा न करें, वे यह थे कि हम न चेहरे को नोचें और न ही हाय बर्बादी! हाय बर्बादी! पुकारें और न गरीबान फाड़ें और न बालों को नोचें

عن أسيد بن أبي أسيد التابعي، عن امرأة من المبايعات، قالت: كان فيما أخذ علينا رسولُ الله صلى الله عليه وسلم في المعروف الذي أخذ علينا أن لا نعصيه فيه: أن لا نَخْمِشَ وجهًا، ولا نَدْعُوَ وَيْلًا، ولا نَشُقَّ جَيْبًا، وأن لا نَنْشُرَ شَعْرًا.
उसैद बिन अबु उसैद ताबिई, एक बैअत करने वाली सहाबिया से रिवायत करते हैं कि उन्होंने कहा: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमसे जो नेक वचन लिए थे और आदेश दिया था कि हम उनमें से किसी भी वचन का उल्लंघन न करें, उनमें से यह भी था कि हम (किसी की मौत के गम में) चेहरे को न नोचें और न ही हाय बर्बादी, हाय बर्बादी! पुकारें और न गरीबान फाड़ें और न बालों को नोचें या बालों को खोलकर अपने गम का इज़हार करें।
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ الطبعة الرابعة عشر 1407هـ. كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430هـ. بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي، سنة النشر: 1418هـ- 1997م. سنن أبي داود، تأليف: سليمان بن الأشعث السِّجِسْتاني، تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، الناشر: المكتبة العصرية، صيدا. صحيح الترغيب والترهيب، تأليف: محمد ناصر الدين الألباني، الناشر: مكتبة المعارف، الطبعة: الخامسة. رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي ، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل، الطبعة: الأولى، 1428هـ.

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जब अल्लाह ने आदम को पैदा किया, तो उनकी पीठ पर हाथ फेरा और उनकी पीठ से वह सारी रूहें (आत्माएँ) निकल आईं, जिन्हें अल्लाह उनकी नस्ल से क़यामत तक पैदा करेगा

عن أبي هريرة رضي الله عنه ، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «لما خلق اللهُ آدمَ مسح ظهره، فسقط من ظهره كل نَسَمة هو خالقها من ذُرِّيته إلى يوم القيامة، وجعل بين عيني كل إنسان منهم وَبِيصًا من نور، ثم عرضهم على آدم فقال: أي رب، مَن هؤلاء؟ قال: هؤلاء ذريتك، فرأى رجلا منهم فأعجبه وَبِيصُ ما بين عينيه، فقال: أي رب مَن هذا؟ فقال: هذا رجل من آخر الأمم من ذُرِّيتك يقال له: داود. فقال: رب كم جعلتَ عُمُرَه؟ قال: ستين سنة، قال: أي رب، زِده من عُمُري أربعين سنة. فلما قضي عمر آدم جاءه مَلَكُ الموت، فقال: أوَلَم يبقَ من عمري أربعون سنة؟ قال: أوَلَم تُعْطِها ابنَك داود قال: فجَحَدَ آدمُ فجحدت ذُرِّيتُه، ونسي آدمُ فنسيت ذُرِّيتُه، وخَطِئ آدم فخَطِئت ذُرِّيتُه».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब अल्लाह ने आदम को पैदा किया, तो उनकी पीठ पर हाथ फेरा और उनकी पीठ से वह सारी रूहें (आत्माएँ) निकल आईं, जिन्हें अल्लाह उनकी नस्ल से क़यामत तक पैदा करेगा तथा हर इनसान की दोनों आँखों के बीच में नूर की एक चमक रख दी। फिर उन्हें आदम (अलैहिस्सलाम) के सामने रखा। इसपर आदम (अलैहिस्सलाम) ने कहा: ऐ मेरे रब! ये कौन लोग हैं? अल्लाह ने कहा: ये सब तेरी संतानें हैं। आदम (अलैहिस्सलाम) ने उनके बीच एक व्यक्ति को देखा, जिसके दोनों आँखों के बीच की चमक उन्हें बड़ी अच्छी लगी, तो बोले: ऐ मेरे रब! यह कौन है? अल्लाह ने कहा: यह तेरी नस्ल की अंतिम जातियों में पैदा होने वाला एक व्यक्ति है, जिसे दाऊद कहा जाएगा। उन्होंने कहा: ऐ मेरे रब! उसकी आयु तूने कितनी निर्धारित की है? अल्लाह ने कहा: साठ साल। उन्होंने कहा: ऐ मेरे रब! मेरी आयु से चालीस साल काटकर उसे दे दे। फिर जब आदम (अलैहिस्सलाम) की आयु समाप्त हो गई, तो मौत के फ़रिश्ते ने उनसे कहा: क्या मेरी आयु के चालीस वर्ष शेष नहीं रह गए हैं? फ़रिश्ते ने उत्तर दिया: क्या आपने वह चालीस साल अपने बेटे दाऊद (अलैहिस्सलाम) को नहीं दे दिए थे? अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फ़रमाते हैं: आदम ने इनकार किया, तो उनकी संतान भी इनकार करने वाली बन गई, आदम भूल गए, तो उनकी संतान भी भूलने वाली बन गई और आदम ने ग़लती की, तो उनकी संतान भी ग़लती करने वाली बन गई।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

سنن الترمذي، نشر: شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي – مصر، الطبعة: الثانية، 1395هـ - 1975م. صحيح الجامع الصغير وزياداته، للألباني، نشر: المكتب الإسلامي. المصباح المنير في غريب الشرح الكبير، لأحمد بن محمد بن علي الفيومي، الناشر: المكتبة العلمية – بيروت. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان، الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002م. مجموع الفتاوى، لتقي الدين أحمد بن عبد الحليم بن تيمية الحراني، المحقق: عبد الرحمن بن محمد بن قاسم، الناشر: مجمع الملك فهد لطباعة المصحف الشريف، المدينة النبوية، المملكة العربية السعودية، عام النشر: 1416هـ/1995م. صفات الله عز وجل الواردة في الكتاب والسنة- علوي بن عبد القادر السَّقَّاف- الناشر: الدرر السنية - دار الهجرة-الطبعة: الثالثة، 1426 هـ - 2006م. قصص الأنبياء-أبو الفداء إسماعيل بن عمر بن كثير -تحقيق: مصطفى عبد الواحد -الناشر: مطبعة دار التأليف - القاهرة-الطبعة: الأولى، 1388 هـ - 1968 م.

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जब अल्लाह किसी बंदे को किसी स्थान में मृत्यु देना चाहता है, तो वहाँ उसकी कोई ज़रूरत रख देता है।

عن أبي عزة الهذلي رضي الله عنه قال قال رسول الله صلى الله وسلم: «إذا أراد اللهُ قَبْضَ عبد بأرض جعلَ له بها حاجة».
अबू अज़्ज़ा हुज़ली -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जब अल्लाह किसी बंदे को किसी स्थान में मृत्यु देना चाहता है, तो वहाँ उसकी कोई ज़रूरत रख देता है।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद तयालिसी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

سنن الترمذي، محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر، ومحمد فؤاد عبد الباقي، وإبراهيم عطوة عوض، شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، مصر، الطبعة: الثانية، 1395هـ، 1975م. مسند الإمام أحمد بن حنبل، أحمد بن حنبل أبو عبدالله الشيباني، تحقيق: شعيب الأرنؤوط و عادل مرشد، وآخرون، تحت إشراف: عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى1421هـ. مسند أبي داود الطيالسي، أبو داود سليمان بن داود الطيالسي، تحقيق: محمد بن عبد المحسن التركي، الناشر: دار هجر، مصر، الطبعة: الأولى، 1419هـ، 1999م. سلسلة الأحاديث الصحيحة وشيء من فقهها وفوائدها، محمد ناصر الدين الألباني، مكتبة المعارف للنشر والتوزيع، الرياض، الطبعة الأولى لمكتبة المعارف، 1422هـ. الصحاح تاج اللغة وصحاح العربية، إسماعيل بن حماد الجوهري الفارابي، تحقيق: أحمد عبد الغفور عطار، دار العلم للملايين، بيروت، الطبعة: الرابعة 1407هـ، 1987م. فيض القدير شرح الجامع الصغير، زين الدين محمد عبد الرؤوف المناوي، المكتبة التجارية الكبرى، مصر، الطبعة: الأولى 1356هـ.

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  1. जिसके साथ अल्लाह भलाई का इरादा करता है, उसे मुसीबतों में डालकर आज़माता है।
  2. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुसीबत के समय चीख़-चीख़ कर रोने वाली, बाल मुँडवाने वाली और कपड़े फाड़ने वाली औरतों से अपने बरी होने का एलान किया है।
  3. “शक्तिशाली मोमिन कमज़ोर मोमिन के मुकाबले में अल्लाह के समीप अधिक बेहतर तथा प्रिय है, किंतु प्रत्येक के अंदर भलाई है।
  4. जब तुम्हें धरती के किसी भाग में ताऊन (प्लेग) फैलने का समाचार मिले, तो वहाँ न जाओ और यदि ऐसी जगह फैले जहाँ तुम (पहले से) उपस्थित हो, तो फिर वहाँ से न भागो।
  5. अगर तुम उहुद पर्वत के बराबर भी सोना खर्च कर दो तो अल्लाह उसे ग्रहण नहीं करेगा, जब तक तक़दीर पर ईमान न रखो और इस बात पर विश्वास न रखो कि जो चीज़ तुम्हें मिलने वाली है, वह तुम्हारे हाथ से निकल नहीं सकती और जो तुम्हें नहीं मिलने वाली, वह तुम्हारे हाथ लग नहीं सकती। अगर तुम इसके सिवा किसी और आस्था पर मरोगे तो जहन्नम में प्रवेश करने वालों में शामिल हो जाओगे।
  6. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमसे जो नेक वचन लिए थे कि हम उनमें से किसी में भी आपकी अवज्ञा न करें, वे यह थे कि हम न चेहरे को नोचें और न ही हाय बर्बादी! हाय बर्बादी! पुकारें और न गरीबान फाड़ें और न बालों को नोचें
  7. जब अल्लाह ने आदम को पैदा किया, तो उनकी पीठ पर हाथ फेरा और उनकी पीठ से वह सारी रूहें (आत्माएँ) निकल आईं, जिन्हें अल्लाह उनकी नस्ल से क़यामत तक पैदा करेगा
  8. जब अल्लाह किसी बंदे को किसी स्थान में मृत्यु देना चाहता है, तो वहाँ उसकी कोई ज़रूरत रख देता है।
  9. जब अल्लाह किसी बंदे के साथ भलाई चाहता है, तो उसकी मृत्यु से पहले उस से अच्छे कार्य करवाता है।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com